अब देखिए, आज मानव चाँद, मंगल तक पहुँच गया लेकिन वो यह नहीं जान पाया कि वो वास्तव में है कौन, मतलब इंसान के मरने के बाद ऐसी कौन सी चीज है जो उसमें से निकल जाती है?
वास्तव में इस बात का जबाव किसी भी मनुष्य के पास नहीं है। इसका जबाव वही दे सकता है, जो इस संसार को रचने वाला है, मतलब रचयिता। ओर इस संसार का रचयिता है-खुद भगवान।
1936-37 में खुद भगवान (निराकार) इस धरती पर साधारण बूढ़े तन में आया और उन्होने इस साधारण बूढ़े तन वाले इंसान को नाम दिया-ब्रह्मा।
भगवान ने इनके तन में अवतरित होकर बताया कि मेरे बच्चे, वास्तव में तुम ये शरीर नहीं हो, जो हर रोज तुम शीशे में देखते हो।
जिस तरह ड्राइवर के बिना गाड़ी चल नहीं सकती, ठीक उसी तरह आत्मा(सितारे) के बिना शरीर भी चल नहीं सकता।
तो इन दो बातों के बारे में(खुद के बारे और खुदा के बारे) हमनें अच्छे से जाना, इनका ज्ञान लिया, अब हम भगवान से सम्बन्ध(लिंक) बहुत ही आसानी से जोड़ पाँएगे।
जैसे-जैसे हम भगवान से सम्बन्ध जोड़ते जाँएगे, उनको याद करते जाँएगे, वैसे-वैसे हमारे अन्दर शक्तियाँ जागने लगेंगी। ओर शक्तियाँ जागने से हमारा Silence level बढ़ जाएगा, जिससे हमारी Controlling और Decision-making Power बढ़ जाएगी।फिर हमें किसी भी बात में परेशानी नहीं होगी, ओर हम जिन्दगी को पहले की तुलना में बहुत अच्छे तरीक्के से जी पाँएगे।
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