Saturday, November 21, 2015

Day 4

अब मुख्य बात है कि भगवान(Power-house) से सम्बन्ध जोड़ा कैसा जाए, आइए जानते हैं:-

(01). स्वंयम सर्वशक्तिमान परमात्मा पिता मेरे साथ है, मैं आत्मा उनकी संतान हूँ, मैं आत्मा मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ। इस बात को 21 बार सुबह और 21 बार शाम को डायरी में लिखें।

(02). और नीचे लिखे गीतों को कम-से-कम दिन में दो बार जरूर सुनें(विशेष कानों में Head-phones लगाकर):-

01). इक बार चले आओ...भक्तों ने पुकारा है...

02). गुरू ब्रह्मा, गुरू विष्णु, गुरू महेश्वरा...

03). सारे तीर्थ धाम आपके चरणों में...

04). आपकी संतान है हम...आपसे क्या प्रार्थना...

05). आबू के तीर्थ तुमको पुकारें...आ जाओ ब्रह्मा बाबा हमारे...आना ही होंगा...

06). बाबा तुम हो हमारे, हम हैं तुम्हारे...

07). वरदान लुटाने वाले, सद्ज्ञान सुनाने वाले...

08). ऐ साँसों...शिव की याद बिना चलते रहना किस काम का है...

9). मेरे मन तू मग्न रह...प्रभु याद में...

10). अब तेरे बिन...इक पल भी ना बीते बाबा...

11). चलो मुसाफिर अपने घर...अब तो पूरा हुआ सफर...।

03). अगर आप शक्तियाँ बहुत जल्दी ग्रहण करना चाहते हैं तो सुबह 4 बजे और शाम 7 बजे बैठकर 15-15 मिनट योग लगाइए, उस समय वातावरण बिल्कुल शांत होता है, इसलिए परमात्मा की शक्तियाँ उस समय बहुत जल्दी प्राप्त हो सकती हैं। यहाँ पर एक बात ध्यान रखें कि योग लगाने के समय आप वहाँ ना बैठें जहाँ आप सोते हो।

4). परमात्मा से योग लगाना कैसे है, उसके लिए आप नेट से इस वीडियो की मदद ले सकते हैं।

5). परमात्मा से योग लगाने के लिए 100 में से 98 लोगों का बहाना होता है कि टाइम ही नहीं मिलता। लेकिन यह हमारी गल्तफहमी है। दिन में हम तीन बार भोजन करते हैं ओर एक बार भोजन करने में हमें 15 मिनट तो लगते ही हैं...यानि कि हम सभी 15*3=45 मिनट तो भगवान को याद कर ही सकते हैं।

परमात्मा से लिंक जोड़ते समय नीचे लिखी बातों का बहुत ख्याल रखें:-

01). टी.वी. या नेट पर चलने वाले नाटक और पिक्चरस से बचें, अगर आपको देखना ही है तो हँसी-मजाक वाले या कार्टून या फिर आध्यात्मिक चैनल्स ही देखें। सांइस ने Experiment किया है कि आजकल के नाटक और पिक्चरस इंसान को सबसे ज्यादा कमजोर बना रहे हैं।

02). अपनी दोस्ती केवल उनसे ही रखें जो हमेशा अच्छा सोचते हैं, दूसरों का भला चाहते हैं।

03). बाजार की तली हुई चीजें और खुली मिठाईयाँ शरीर की नाड़ियों में जहर घोलती हैं, इनसे विशेष बचें। अगर आप खाना ही चाहते हैं तो इन चीजों को घर में बनाइए प्रभु की याद में (परमात्मा के गीत लगाकर)।

04). सबसे बड़ी बात...अपनी दृष्टि पर सबसे ज्यादा ध्यान दीजिए, हम किसी को भी गल्त निगाहों से ना देखें, हम दूसरों को इस भाव से देखें कि ये भी भगवान के बच्चे हैं...इनका भी भला हो।

परमात्मा से लिंक जोड़ने से आपको क्या-क्या फायदे होंगे:-

01). मन भटकेगा नहीं, शांत होता जाएगा।

02). आप हरेक काम बहुत अच्छे से कर सकेंगे और आपको थकावट भी नहीं होगी।

03). आप की अन्तर की शक्तियाँ जागृत होंगी, जिससे बड़ी बात भी आपके लिए छोटी हो जाएगी, आप गुस्से को पीना सीख जाँएगे।

04). आप घर, व्यापार के सभी कार्य या फिर स्कूल, कालेज की पढ़ाई बड़ी सुंदरता से कर सकेंगे।

05). सबसे बड़ी बात आपमें खुशी आएगी, जिससे आप जिन्दगी को पहले की तुलना में बहुत अच्छे से जी सकेंगे।

06). उससे भी बड़ी बात आपको घर बैठे खुद भगवान मिल जाँएगे। 07). आप हर समस्या को बड़ी आसानी से हल कर पाँएगे।

08). यदि आप पूरी लग्न से परमात्मा से लिंक जोड़ेंगे, तो 100% आपकी लाइफ में चेंज आएगा।

आइए, अब जानते हैं एक ऐसे सवाल का जबाव, जो आमतौर पर हरेक मानव के मन में उठ जाता है कि भगवान ने ये संसार बनाया ही क्यूं...?

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देखिए अब, जिस तरह टी.वी. पर चलने वाली पिक्चर 3-4 घण्टे की होती है, ठीक उसी तरह संसार की पिक्चर पूरे 5000 वर्ष की है।इस पिक्चर में 4 बड़े युग होते हैं-सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग। इन सबकी आयु 1250 वर्ष होती है।

इन चारों युगों के अलावा एक छोटा-सा लीप युग होता है, जिसे संगमयुग कहते हैं। ये 100 वर्ष का होता है। सबसे पहले-पहले इस संसार में आदि सनातन देवी-देवता धर्म की आत्माँए, रोल प्ले करने आई, सतयुग, त्रेतायुग में। इसके बाद फिर द्वापर, कलियुग में मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख धर्म की आत्माँओ के साथ-साथ अन्य छोटे-छोटे धर्मों की आत्माँए रोल प्ले करने आई। हम सभी भी इन चारों धर्मों में से किसी एक धर्म में आए थे, रोल प्ले करने ओर जब आए थे इस धरती पर पहले-पहले, तब हम बहुत ही सुखी, शान्त व शक्तिशाली थे। हमनें धरती पर रहकर अनेक शरीर बदले(क्योंकि आत्मा एक शरीर बदल दूसरा धारण करती है)। धरती पर रोल खेलते-खेलते एक समय ऐसा आया कि हम सभी में बुराईयाँ(काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, नफरत, डर, आलस) राज करने लगी। फिर हम इन बुराईयों के शिकंजे में फँसते गए ओर बुराईयों के वश होकर हम कुकर्म करने लगे, इसी कारण ही आज हम इतने कमजोर पड़ गए, बुरे कर्म करते-करते कि भगवान को दोष देने लगे कि तूने यह दुनिया बनाई ही क्यूँ।

लेकिन भगवान ने तो ऐसी दुनिया बनाई थी, जिसमें एक भी दुखी नहीं था, सब बड़ी खुशी और प्रेम से रहते थे। लेकिन समय बीतते-बीतते हम बुराईयों के जाल में फँस गए ओर बुरे कर्म करते-करते कमजोर पड़ गए।

एक छोटा सा युग है, (संगमयुग) इस पिक्चर में, (यह युग कलियुग के अंत और सतयुग के बीच आता है)।इसमें खुद भगवान(शिव) इस धरती पर आते हैं, ब्रह्मा के साधारण बूढ़े तन में, 1937 में। खुद भगवान ही आकर इस सारी पिक्चर का राज समझाते हैं कि तुम वास्तव में हो कौन, संसार में कब आए, परेशान क्यूँ हुए। उन्होंने ही आकर इंसान को खुद की और खुदा की असली पहचान दी। और बताया कि बच्चे, यह संसार रूपी पिक्चर अब पूरी होने जा रही है, अब सभी को वहीं लौटना है, जहाँ से हम आए थे, उस लाल प्रकाश के घर से।

अब इस पुरानी दुनिया का विनाश होंगा-एटामिक बाम्बस से, प्राकृतिक आपदाओ से, ग्रह युद्धों से।

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क्योंकि संसार की 5000 वर्ष की पिक्चर अब पूरी होने जा रही है।

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सभी लौटेंगे, अब वहाँ, जहाँ खुद भगवान रहते हैं।

इस पुराने संसार के विनाश के बाद नई दुनिया स्वर्ग आएगी, जिसमें सभी फिर से सुखी जाँएगे ओर केवल एक ही धर्म होंगा-आदि सनातन देवी-देवता धर्म...इसके बाद फिर अन्य धर्मों की आत्माँए अपने-अपने समयानुसार इस संसार में फिर से आंएगी। इस प्रकार यह संसार की पिक्चर हर 5000 वर्ष बाद बिल्कुल पहले की तरह ही रिपीट होती है। अब सबको अपने असली घर परमधाम(शान्ति-धाम) लौटना है।

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(नई दुनिया)

परमधाम(शान्तिधाम)

इसलिए भगवान कहते हैं-मेरे बच्चे, मेरे से लिंक(सम्बन्ध) जोड़ो। अपने को आत्मा समझ मुझे याद करो, मुझे याद करने से तुम्हारे सिर पर जो पापों का बोझा है, वह उतर जाएगा। और फिर तुम सम्पूर्ण हल्के हो जाओगे।

अगर हम भगवान को याद नहीं करते, फिर हमें ऊपर जाकर धर्मराज की सज़ाँए खानी पड़ेंगी। क्योंकि असली घर जाने से पहले हमारी आत्मा का शुद्ध(पवित्र) होना बहुत जरूरी है, इसलिए पापों का बोझ उतारना बहुत जरूरी है। मर्जी हमारी है-ये हम उतारें...या तो भगवान की याद से या फिर सजाओ से। तो ये है पूरा सच, संसार की कहानी का। आप इसको सच मानें या झूठ, मर्जी आपकी है। हम अगर भगवान को याद करेंगे, तो वो हमको मुक्ति का वरदान दे देंगे।

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