आज संसार के 80% लोगों को ये कमी फील हो रही है, क्या आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है, अगर हाँ, तो आइए जानते हैं कि कैसे इस कमी को पूरा किया जाए।
अब मुख्य बात है कि इस कमी को भरा कैसे जाए, तो देखिए, सीधी सी बात है-जब हमारे अन्दर की शक्तियाँ वापिस आने लगेगीं, फिर हमारी खुशी भी जागृत होने लगेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अन्दर की शक्तियाँ हमें देगा कौन? सवाल का जबाव बिल्कुल आसान है। अन्दर की शक्तियाँ वापिस हमें वही दे सकता है जो इन शक्तियों का भण्डार हो, Power-house हो, ओर इन शक्तियों का भण्डार है-खुद परमात्मा। मतलब कि इन शक्तियों को फिर से जगाने के लिए हमें परमात्मा(Power-house) से सम्बन्ध जोड़ना होंगा, ओर परमात्मा से सम्बन्ध जोड़ने से पहले हमें सबसे पहले दो बातों की पहचान होना बहुत जरूरी है:-
कौन-कौन सी:-
1). खुदा(परमात्मा) की असली पहचान।
2). खुद की असली पहचान।
जानते हैं सबसे पहले खुदा(परमात्मा) की असली पहचान:-
देखिए परमात्मा एक है, हम सभी जानते हैं लेकिन जानते हुए भी कोई माँ शेराँवाली को, कोई श्रीराम को, कोई हनुमान को, कोई वाहेगुरू को तो कोई यीशु को भगवान मानता है। अब असली बात देखिए, परमात्मा उसे ही कहा जाएगा जिसे संसार के मुख्य सभी धर्म बराबर मान्यता देते हों। संसार के मुख्य धर्म हैं:-हिन्दु, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई। देखते हैं-ये चारों धर्म भगवान को कैसे मान्यता देते हैं:-
आइए जानते हैं सबसे पहले कि हिन्दु धर्म क्या कहता है:-
पिक्चर में आप देख रहे हैं कि खुद श्रीराम जी शिवलिंग की पूजा कर रहे हैं, इसका मतलब हुआ कि शिव, श्रीराम से भी बड़े हैं। अगर श्रीराम खुद भगवान होते, तो उन्हे खुद की ही पूजा की क्या जरूरत थी, और एक ओर बात, जो हम सभी जानते हैं कि श्रीराम एवंम श्रीकृष्ण की एक ही आत्मा थी मतलब दोनों एक ही व्यक्ति के दो रूप थे।
तो इससे पता चलता है कि शिव इन दोनों से भी उंच हैं। श्रीराम और श्रीकृष्ण तो देवता हैं लेकिन शिव परमात्मा हैं।
यहाँ पर एक ओर बात क्लीयर करने योग्य है कि शिव और शंकर में भी फर्क है।
खुद शंकर जी भी शिव की पूजा करते हैं। शंकर जी तो देवता हैं लेकिन शिव वो हैं जो शिवलिंग में तीन लाइनों के बीच बिन्दु दिखाई गई है। मतलब शिव निराकार ज्योति बिन्दु हैं, लाइट (प्रकाश) हैं। तो ये सब बातें थी हिन्दु धर्म की। मतलब हिन्दु धर्म शिव को सबसे उंच मानता है। मुस्लिम धर्म की बात सुनिए, इनका जो Head-office है मक्का में, उसके अन्दर शिवलिंग का ही पत्थर रखा हुआ है, जिसे वो अल्लाह कह कर याद करते हैं।
सिक्ख धर्म के संस्थापक श्री गुरू नानक देव जी ने कहा था...परमात्मा इक है अते ओह इक नूर है, ज्योति है, मतलब निराकार है।
ईसाई धर्म के मसीहा यीशु जी ने भी कहा-'God is light.'
तो ये हैं संसार के मुख्य चार धर्म, जिन्होने कहा कि परमात्मा निराकार है, ज्योति है, प्रकाश है, मतलब कि हमें शक्तियाँ लेने के लिए सम्बन्ध भी निराकार से ही जोड़ना होंगा।
ये तो थी परमात्मा (खुदा) की असली पहचान। अब देखते हैं कि हम कौन हैं वास्तव में अर्थात हमारी असली पहचान क्या है?
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
| Rajyoga meditation course | |||
|---|---|---|---|
| Day 1 | Day 2 | Day 3 | Day 4 |
No comments:
Post a Comment